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Bihar Education News: बिहार के स्कूलों में क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने की तैयारी, कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाई की योजना

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक बच्चों को मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, मगही और अंगिका में से किसी एक भाषा को अतिरिक्त भाषा के रूप में पढ़ाने की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने कई अहम निर्देश दिए हैं।

पटना, 7 अक्टूबर आलम की खबर: बिहार की शिक्षा व्यवस्था में क्षेत्रीय भाषाओं को नई पहचान देने की तैयारी तेज हो गई है। सरकार कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, मगही और अंगिका में से किसी एक भाषा को अतिरिक्त भाषा के रूप में पढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों के साथ इस योजना के अलावा स्कूलों की आधारभूत संरचना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की।

स्थानीय भाषा से बच्चों को जोड़ने की तैयारी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बच्चों को उनकी स्थानीय भाषा और संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में शुरुआती कक्षाओं के विद्यार्थियों को बिहार की प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में से एक भाषा पढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।

मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, मगही और अंगिका को विकल्प के तौर पर शामिल करने की तैयारी है। विभाग का उद्देश्य बच्चों की स्थानीय भाषाओं के प्रति समझ विकसित करने के साथ उनकी सीखने की क्षमता को बेहतर बनाना है।

मध्यमा पास विद्यार्थियों के लिए आगे की पढ़ाई का रास्ता

समीक्षा बैठक में मध्यमा परीक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के माध्यम से मध्यमा पास विद्यार्थियों को प्लस टू स्तर की पढ़ाई की सुविधा देने की तैयारी है।

इसके लिए संबंधित एक्ट में आवश्यक संशोधन किए जाने पर काम चल रहा है। बैठक में बताया गया कि पिछले वर्ष करीब 24 हजार विद्यार्थियों ने मध्यमा की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। ऐसे विद्यार्थियों को आगे की शिक्षा से जोड़ने के लिए व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।

संस्कृत विद्यालयों और मदरसों की जांच जल्द होगी पूरी

राज्य के संस्कृत विद्यालयों और मदरसों से संबंधित जांच रिपोर्ट को लेकर भी शिक्षा विभाग ने समयसीमा तय की है। अधिकारियों को अधिकतम एक महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जांच से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। संबंधित अधिकारियों को तय समय के भीतर कार्रवाई पूरी करने को कहा गया है।

बक्सर में गुरुकुलम विद्यापीठ की तैयारी

बक्सर के सिमरी में प्रस्तावित गुरुकुलम विद्यापीठ की योजना पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। कर्नाटक स्थित सत्य साई आश्रम का दौरा कर लौटी टीम ने वहां की व्यवस्था और विशेषताओं का प्रस्तुतीकरण अधिकारियों के सामने किया।

इसी आधार पर बक्सर में प्रस्तावित गुरुकुलम की डिजाइन भी बैठक में प्रस्तुत की गई। शिक्षा मंत्री ने बताया कि गुरुकुलम के लिए पांच एकड़ जमीन उपलब्ध हो चुकी है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जमीन की मांग भी की जा सकती है।

जर्जर स्कूल भवनों की होगी तकनीकी जांच

सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य के सभी जर्जर विद्यालय भवनों की तकनीकी जांच अभियंताओं की टीम करेगी।

प्रधानाध्यापकों को अपने विद्यालय के जर्जर भवन की तस्वीर ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इन तस्वीरों के साथ अभियंताओं की तकनीकी जांच के आधार पर पूरे राज्य के जर्जर स्कूल भवनों की सूची तैयार की जाएगी।

इस व्यवस्था से विभाग को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन स्कूलों के भवनों की मरम्मत जरूरी है और किन भवनों के लिए नए निर्माण की आवश्यकता है।

स्कूलों के आधारभूत विकास पर भी जोर

विद्यालयों की आधारभूत संरचना से जुड़े विकास कार्यों को ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जोड़ने पर भी बैठक में विचार किया गया। विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के माध्यम से विद्यालयों में विकास कार्य कराने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

सरकार की कोशिश है कि स्कूलों की जरूरी सुविधाओं को बेहतर करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा हों।

दीपावली से पहले लाभार्थियों के खाते में पहुंचेगी राशि

छात्र-छात्राओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं की राशि को लेकर भी शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया। कन्या उत्थान योजना, बालिका प्रोत्साहन योजना समेत विभिन्न योजनाओं की राशि दीपावली से पहले लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजने को कहा गया है।

इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और लाभार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।

शिक्षकों की लंबित फाइलों पर सख्ती

शिक्षकों की सेवा से संबंधित लंबित मामलों को लेकर भी विभाग ने अधिकारियों की जवाबदेही तय की है। शिक्षा सचिव राजीव रौशन ने सभी डीपीओ स्थापना को लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने का निर्देश दिया।

निर्देश के मुताबिक आवेदन मिलने के 15 दिन बाद भी अगर कोई मामला लंबित रहता है तो उसकी फाइल निदेशक और सचिव स्तर तक भेजी जाएगी। लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

700 मॉडल स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विस्तार

बैठक में राज्य के 700 मॉडल स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विस्तार पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को इन विद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता और उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने को कहा गया।

इसके अलावा 10 अक्टूबर को पटना के बापू सभागार में आयोजित होने वाले ‘मेरे सपनों का भारत : सेवा चित्र’ राज्यस्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।

शिक्षा व्यवस्था में एक साथ कई बदलावों की तैयारी

क्षेत्रीय भाषाओं को शुरुआती कक्षाओं में शामिल करने से लेकर जर्जर स्कूल भवनों की पहचान, मध्यमा विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई, मॉडल स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्र-छात्राओं से जुड़ी योजनाओं की राशि तक शिक्षा विभाग ने कई मोर्चों पर काम तेज करने के संकेत दिए हैं।

अब इन योजनाओं और निर्देशों को जमीन पर कितनी तेजी से लागू किया जाता है, इसका असर आने वाले समय में स्कूलों, विद्यार्थियों और शिक्षकों के स्तर पर दिखाई देगा।

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बिहार की शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों, विद्यार्थियों और सरकारी योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें पढ़ने के लिए Alam Ki Khabar पर पढ़ें।

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